खेती-किसानी

किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की सलाह ; बिहार हेयरी कैटरपिलर रोग से सोयाबीन की फसल को ऐसे बचाएं

सोयाबीन की फसल में रोग नियंत्रण (Bihar Hairy Caterpillar Rog Niyantran) के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह जारी की है।

Bihar Hairy Caterpillar Rog Niyantran | मध्य प्रदेश में इस वर्ष अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग दिनांक को बोलने का कार्य हुआ जिसके चलते कहीं पर सोयाबीन की फसल 20 से 25 दिन की है, तो कहीं पर 30 दिन की हो गई है।

रासायनिक दवाइयों एवं निराई गुड़ाई से खरपतवार नियंत्रण करने के पश्चात किसानों के लिए अब फसल को किट रोग से बचाना अति आवश्यक हो गया है। क्योंकि वर्तमान में जानकारी मिल रही है कि सोयाबीन की फसल में कीट रोग लगने लगे हैं। इस स्थिति को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए सोयाबीन की फसल को किस रोग से बचाने हेतु महत्वपूर्ण सुझाव/सलाह जारी की है।

भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान ने जारी की सलाह

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष बोवनी की तिथियों में भिन्नता देखी गई है। कुछ क्षेत्रों में सोयाबीन (Bihar Hairy Caterpillar Rog Niyantran) की फसल 25.30 दिन, कुछ क्षेत्रों में 15-20 दिन की हुई है।

अतः उक्त परिस्थिति में सोयाबीन उत्पादक कृषकों को भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थानए इंदौर की अनुशंसा के आधार पर कृषि विभाग द्वारा जिले के किसानों को निम्नानुसार सलाह दी जाती है।

बिहार हेयरी कैटरपिलर का प्रकोप से फसल को ऐसे बचाए

Bihar Hairy Caterpillar Rog Niyantran | कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में बिहार हेयरी कैटरपिलर का प्रकोप प्रारंभ होने की सूचना हैं।

किसानों को सलाह है कि प्रारंभिक अवस्था में झुण्ड में रहने वाली इन इल्लियों को पौधे सहित खेत से निष्कासित करें एवं इसके नियंत्रण हेतु फसल पर क्विनालफॉस 25 ईसी (1 लीटर प्रति हेक्टेयर) या लैम्बडा सायहेलोथ्रिन 4.90 सीएस, 300 मिली प्रति हेक्टेयर या इंडोक्साकार्ब 15.8 एससी, 333 मिली प्रति हेक्टेयर का छिडकाव करें।

कुछ क्षेत्रो में रायजोक्टोनिया एरिअल ब्लाइट का प्रकाप होने की सूचना प्राप्त हुई है। कृषकों को सलाह हैं कि नियंत्रण के लिए हेक्साकोनाझोल 5 ईसी (1 मिली प्रति लीटर पानी) का छिडकाव करें।

कीट सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए यह करें

लगातार वर्षा होने की स्थिति में अपने खेत (Bihar Hairy Caterpillar Rog Niyantran) से अतिरिक्त जल.निकासी की व्यवस्था सुनिश्ति करें। अपने खेत की नियमित निगरानी करें एवं 3.4 जगह के पौधों को हिलाकर सुनिश्ति करें कि क्या आपके खेत में किसी इल्लीध्कीट का प्रकोप हुआ है या नहीं और यदि हैं, तो कीडों की अवस्था क्या हैं।

तदानुसार उनके नियंत्रण के उपाय अपनाएं। पीला मोजेक रोग से सुरक्षा हेतु रोगवाहक कीट सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए अपने खेत में विभन्न स्थानों पर पीला स्टिकी ट्रैप लगाएं।

तना मक्खी के नियंत्रण हेतु सलाह

Bihar Hairy Caterpillar Rog Niyantran | सोयाबीन की फसल को भारी क्षति पहुंचाने वाली तना मक्खी कीट नियंत्रण के लिए कृषि वैज्ञानिकों का सुझाव है है कि पूर्वमिश्रित कीटनाशक थायोमिथोक्सम 12.60 प्रतिशत+लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 9.50 प्रतिशत+जेडसी (125 मिली प्रति हेक्टेयर) का छिडकाव करें। सोयाबीन की फसल में पक्षियों की बैठने हेतु ‘टी’ आकार के बर्ड. पर्चेस लगाये। इससे कीटभक्षी पक्षियों द्वारा भी इल्लियों की संख्या कम करने में सहायता मिलती है।

किसी भी प्रकार का कृषि आदान क्रय करते समय दुकानदार से हमेशा पक्का बिल लें जिस पर बैच नंबर एवं एक्सपायरी दिनांक स्पष्ट लिखा हो। सोयाबीन का जैविक उत्पादन लेने वाले किसान कृपया पत्ती खाने वाली इल्लियों (सेमीलूपर, तम्बाकू की इल्ली) से फसल की सुरक्षा एवं प्रारंभिक अवस्था में रोकथाम हेतु बेसिलस थुरिन्जिएन्सिस अथवा ब्युवेरिया बेसिआना या नोमुरिया रिलेयी (1 लीटर प्रति हेक्टेयर) का प्रयोग करें।

सोयाबीन की पत्ती खाने वाले कीटों से सुरक्षा हेतु यह करें

सोयाबीन फसल (Bihar Hairy Caterpillar Rog Niyantran) में तम्बाकू की इल्ली एवं चने की इल्लियों के प्रबंधन हेतु बाजार में उपलब्ध कीट विशेष फेरोमोन ट्रैप या प्रकाश प्रपंच लगाये। जहाँ पर फसल 15-20 दिन की हो गई हो, पत्ती खाने वाले कीटों से सुरक्षा हेतु फूल आने से पहले ही सोयाबीन फसल में क्लोरइंट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी (150 मिली प्रति हेक्टेयर) का छिडकाव करें। इससे अगले 30 दिनों तक पर्णभक्षी कीटों से सुरक्षा मिलेगी।

तम्बाकू की इल्ली के नियंत्रण हेतु निम्न में से किसी एक कीटनाशक का छिडकाव (Bihar Hairy Caterpillar Rog Niyantran) करने की सलाह है। इससे पत्ती खाने वाली अन्य इल्लियों (चने की इल्ली या सेमीलूपर इल्ली) का भी नियंत्रण होगा। लैम्बडा सायहेलोथ्रिन 4.90 सीएस (300 मिली प्रति हेक्टेयर) या क्विनालफॉस 25 ईसी (1 लीटर प्रति हेक्टेयर) या क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी (150 मिली प्रति हेक्टेयर) या इमामेक्टिन बेंजोएट 1.90 (425 मिली प्रति हेक्टेयर) या इंडोक्साकार्ब 15.8 एससी (333 मिली प्रति हेक्टेयर) या प्रोफेनोफॉस 50 ईसी (1 लीटर प्रति हेक्टेयर) या स्पायनेटोरम 11.7 एससी (450 मिली प्रति हेक्टेयर)।

यह भी पढ़िए….सोयाबीन में कौन सा खाद डालें जिससे उत्पादन अधिक मिलेगा, कृषि विशेषज्ञों से जानें

कम लागत में सोयाबीन आवक अधिक होगी , सोयाबीन की जैविक खेती के बारे में जानिए

सोयाबीन में लगने वाले किट व रोग की रोकथाम कैसे करें, जानिए

जुड़िये चौपाल समाचार से

ख़बरों के अपडेट सबसे पहले पाने के लिए हमारे WhatsApp Group और Telegram Channel ज्वाइन करें और Youtube Channel को Subscribe करें, हम सब जगह हैं।

नोट :- धर्म, अध्यात्म एवं ज्योतिष संबंधी खबरों के लिए क्लिक करें।

नोट :- टेक्नोलॉजी, कैरियर, बिजनेस एवं विभिन्न प्रकार की योजनाओं की जानकारी के लिए क्लिक करें।

राधेश्याम मालवीय

मैं राधेश्याम मालवीय Choupal Samachar हिंदी ब्लॉग का Founder हूँ, मैं पत्रकार के साथ एक सफल किसान हूँ, मैं Agriculture से जुड़े विषय में ज्ञान और रुचि रखता हूँ। अगर आपको खेती किसानी से जुड़ी जानकारी चाहिए, तो आप यहां बेझिझक पुछ सकते है। हमारा यह मकसद है के इस कृषि ब्लॉग पर आपको अच्छी से अच्छी और नई से नई जानकारी आपको मिले।
Back to top button

Adblock Detected

Please uninstall adblocker from your browser.