कृषि समाचार

सेवा सहकारी संस्थाओं से अल्पावधि फसल ऋण लेने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर, सरकार देने वाली है बढ़ी राहत

मध्य प्रदेश प्रदेश के सरकार प्रदेश के लाखों किसानों को डिफाल्टर होने से बचाने में जुट गई है। मामला फसल ऋण (Kharif Season Short Term Crop Loan) से जुड़ा हुआ है।

Kharif Season Short Term Crop Loan : मध्य प्रदेश के लाखों किसान कृषि कार्यों के लिए सेवा सहकारी संस्थाओं से ऋण लेते हैं यह अल्पावधि ऋण वर्ष में दो बार जमा किए जाते हैं। सही समय पर ऋण नहीं जमा करने पर किसानों को डिफाल्टर किसानों की श्रेणी में डाल दिया जाता है। जिसके पश्चात किसानों से ब्याज एवं जुर्माना वसूला जाता है।

किसानों के लिए अल्पावधि फसल ऋण जमा करने की अंतिम तिथि 28 मार्च निर्धारित थी, किंतु इसे किसानों के हित में बढ़ाकर 15 अप्रैल कर दिया गया था। इसके पश्चात भी किसान अल्पावधि ऋण की राशि जमा नहीं करवा पाए। ऐसे किसानों को प्रदेश सरकार अब राहत देने वाली है।

अल्पावधि फसल ऋण योजना क्या है

मध्य प्रदेश के किसानों को प्रदेश सरकार ब्याज रहित ऋण सुविधा मुहैया करवाने के लिए अल्पावधि फसल ऋण (Kharif Season Short Term Crop Loan) योजना चला रही है। इस योजना के तहत प्रदेश सरकार किसानों को सेवा सहकारी संस्था के माध्यम से किसानों को ब्याज रहित ऋण की सुविधा प्रदान की जाती है। प्रदेश में प्रति वर्ष सहकारी समितियों के माध्यम से 35 लाख से अधिक किसानों को शिवराज सरकार ब्याज रहित अल्पावधि कृषि ऋण योजना का लाभ लेते हैं। इसके तहत खरीफ और रबी फसलों के लिए ऋण दिया जाता है। खरीफ फसल का ऋण 28 मार्च और रबी फसल का ऋण चुकाने की अंतिम तिथि 15 जून रहती है। सरकार ने इस बार खरीफ फसल का ऋण चुकाने की अवधि 28 मार्च से बढ़ाकर 15 अप्रैल कर दी थी।

प्रदेश के 12 लाख किसान डिफाल्टर होने की कगार पर

खरीफ सीजन 2021 का ऋण चुकाने की अंतिम अवधि 28 मार्च 2022 थी, जिसे सरकार ने बढ़ाकर 15 अप्रैल कर दिया था। किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं, चना, मसूर और सरसों सरकारी उपार्जन केंद्रों पर बेची, पर उसका भुगतान अभी तक पूरा नहीं हुआ है। इस कारण किसान ऋण अदायगी समय पर नहीं कर पाए और डिफाल्टर हो गए। डिफाल्टर किसानों की संख्या लगभग 12 लाख है। इन किसानों को राहत देने के लिए प्रदेश सरकार जुट गई है। प्रदेश सरकार अब प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों से अल्पावधि कृषि ऋण लेने वाले किसानों को डिफाल्टर होने से बचाने का रास्ता निकालने में सरकार जुट गई है।

65% के लगभग किसान अल्पावधि फसल ऋण जमा नहीं कर पाए

मध्य प्रदेश के 38 जिला सहकारी बैंक के द्वारा प्रदेश की सेवा सहकारी संस्थाओं से किसान अल्पावधि फसल ऋण लेते हैं। इस वर्ष 15 अप्रैल 2022 जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बैंकों की वसूली 35.41% रही। 28 मार्च के पश्चात रिकवरी मात्र 6.69% ही बढ़ी। जब की फसल ऋण जमा करने की अवधि सर्वप्रथम 28 मार्च निर्धारित की गई थी इसके पश्चात उसे बढ़ाकर 15 अप्रैल कर दिया गया था। फिर भी 65% के लगभग किसान अभी भी अल्पावधि फसल ऋण जमा नहीं कर पाए हैं इसकी बड़ी वजह यह है कि किसानों ने समर्थन मूल्य पर जो गेहूं, चना, मसूर बेचें थे, उसका पेमेंट उन्हें प्राप्त नहीं हुआ। बैंकों को किसानों से कुल 19 हजार 417 करोड़ रुपये लेने हैं।

ऋण राशि का समायोजन नहीं होने से डिफॉल्टर हुए किसान

उल्लेखनीय है कि खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग ने चार लाख 90 हजार किसानों का भुगतान किया है, जबकि पांच लाख 72 हजार 154 किसानों ने 44 लाख 45 हजार 937 टन उपज बेची है। इसी तरह एक लाख से अधिक किसान समर्थन मूल्य पर चना बेच चुके हैं। यह राशि किसानों के खातों में जमा नहीं हो पाई, नतीजा ऋण राशि का समायोजन नहीं हो पाया और किसान सहकारी बैंकों के प्रविधान के अनुसार डिफाल्टर हो गए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की बैठक में शनिवार को यह मुद्दा उठा तो उन्होंने इसका रास्ता निकालने के निर्देश दिए।

सरकार ब्याज माफ करने की घोषणा कर चुकी है

किसानों को डिफाल्टर होने से बचाने के लिए सरकार ने ब्याज माफी देने की घोषणा भी की है। इसमें किसानों को मूलधन चुकाना है। इस योजना का खाका तैयार किया जा रहा है। उधर, खरीफ फसल के लिए जिन किसानों ने ऋण लिया था, वे भी डिफाल्डर न हो जाएं, इसके लिए ऋण अदायगी की तारीख बढ़ाई गई थी, लेकिन किसानों को समर्थन मूल्य पर उपज बेचने के बाद भी अब तक पूरा भुगतान नहीं मिल पाया है।

किसानों को डिफाल्टर होने से कैसे बचाया जाएगा?

Kharif Season Short Term Crop Loan : प्रदेश सरकार के निर्देश के पश्चात सहकारिता विभाग ने प्रदेश के लाखों किसानों को डिफाल्टर होने से बचाने के लिए रास्ता निकाल लिया है। सूत्रों के मुताबिक सहकारिता विभाग ने किसानों को डिफाल्टर होने से बचाने के लिए यह रास्ता निकाला है कि जिन किसानों ने समर्थन मूल्य पर उपज बेच दी है और भुगतान नहीं हुआ है, उन्हें डिफाल्टर नहीं माना जाएगा। ऐसे किसान पंजीयन की तारीख से आगामी सीजन के लिए ऋण लेने के पात्र माने जाएंगे।

फायदा यह होगा कि किसानों को समितियों से खाद-बीज के साथ नकद राशि भी पात्रता के अनुसार ब्याज रहित ऋण योजना के अंतर्गत मिल जाएगी। हालांकि, समितियों को ऋण अदायगी की अंतिम तिथि बढ़ाने और जब तक राशि नहीं मिल जाती है, उस दौरान का ब्याज सरकार को वहन करना होगा। बता दें कि अंतिम तिथि बढ़ाने से सरकार पर 70 करोड़ रुपये का भार आया था।

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राधेश्याम मालवीय

मैं राधेश्याम मालवीय Choupal Samachar हिंदी ब्लॉग का Founder हूँ, मैं पत्रकार के साथ एक सफल किसान हूँ, मैं Agriculture से जुड़े विषय में ज्ञान और रुचि रखता हूँ। अगर आपको खेती किसानी से जुड़ी जानकारी चाहिए, तो आप यहां बेझिझक पुछ सकते है। हमारा यह मकसद है के इस कृषि ब्लॉग पर आपको अच्छी से अच्छी और नई से नई जानकारी आपको मिले।
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