खेती-किसानी

लगातार पानी गिरने से सोयाबीन की फसल खराब होने पर यह खाद एवं कीटनाशक का प्रयोग करें

अत्यधिक पानी गिरने से सोयाबीन की फसल (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) खराब हो सकती है, अगर आप चाहते है की फसल खराब न हो, तो यह जरूर जानकारी जानिए

Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022 | देश में सोयाबीन उत्पादन में मध्यप्रदेश अग्रणी है, परंतु हाल ही के कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश में सोयाबीन उत्पादन में मध्यप्रदेश में भारी गिरावट आयी है, जिसके प्रमुख कारणो मे मौसम की विपरीत परिस्थितियां है, जैसे फसल अवधि में अधिक वर्षा होना या बहुत कम वर्षा होना,

ये परिस्थितियां कीट एवं रोग को बहुत हद तक बढ़ाती है, नीचे इन्हीं प्रमुख कीट और रोगों के बारे में जानकारी दी जा रही है और उनका प्रबंधन बताया जा रहा है। सोयाबीन के प्रमुख कीट रोग एवं उनका प्रबंधन कैसे करें जानिए विस्तार से :

लगातार बारिश से ऐसे करें फसल सुरक्षा

इन दिनों खेतों में खरीफ (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) की फसल लगी हुई है। पिछले कई दिनों से लगातार बारिश हो रही है। इस कारण खेतों में पानी भर गया है। खेतों में सोयाबीन, मूंग व उड़द आदि लगी है।

कृषि विज्ञान केंद्र उज्जैन के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी व कृषि वैज्ञानिक डॉ. मुकेश सिंह ने बताया जिले में लगातार बारिश से खेतों में पानी भर गया है, जिससे सोयाबीन सड़ने के साथ उसकी पैदावार कम या बीज हल्का हो जाएगा। फसल को नुकसान को बचाने के लिए किसान खेतों में पानी बिल्कुल जमा नहीं होने दें।

ध्यान रहे कि किसी भी हालत में पांच दिन से ज्यादा खेतों में पानी भरा न रहे, ताकि फसल खराब न हो। अगर खेतों में पानी भरे पांच दिन हो गए, किसान पानी की निकासी के लिए व्यवस्था नहीं कर पाया तो तत्काल पानी निकालें।

यूरिया या पानी (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) में घुलनशील नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम का छिड़काव जरूर कर दें। ताकि फसल खराब होने से बच जाए और अच्छी पैदावार हो सके। डॉ. सिंह कहना है अगर मौसम खुलता है तो खरीफ की फसल में कीट व्याधि बढ़ने की आशंका है। इसके लिए खेत में प्रोफेनोफॉस , साइपरमेथ्रिन कीटनाशक का उपयोग करें ताकि नुकसान न हो।

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कीट नियंत्रण

सोयाबीन की फसल पर बीज एवं छोटे पौधे को नुकसान पहुंचाने वाला नीलाभृंग (ब्‍लूबीटल) पत्‍ते खाने वाली इल्लियां, तने को नुकसान पहुंचाने वाली तने की मक्‍खी एवं चक्रभृंग (गर्डल बीटल) आदि का प्रकोप होता है एवं कीटों (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) के आक्रमण से 5 से 50 प्रतिशत तक पैदावार में कमी आ जाती है। इन कीटों के नियंत्रण के उपाय निम्‍नलिखित है:

कीट नियंत्रण का रासायनिक तरीका

सोयाबीन में कई प्रकार की इल्लियां पत्‍ती छोटी फलियों और फलों को खाकर नष्‍ट (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) कर देती है इन कीटों के नियंत्रण के लिए घुलनशील दवाओं की निम्‍नलिखित मात्रा 700 से 800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।

हरी इल्‍ली की एक प्रजाति जिसका सिर पतला एवं पिछला भाग चौड़ा होता है सोयाबीन के फूलों और फलियों को खा जाती है जिससे पौधे फली विहीन हो जाते हैं। फसल बांझ होने जैसी लगती है। चूकि फसल पर तना मक्‍खी, चक्रभृंग, माहो हरी इल्‍ली लगभग एक साथ आक्रमण करते हैं

अत: प्रथम छिड़काव 25 से 30 दिन पर एवं दूसरा छिड़काव 40-45 दिन की फसल (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) पर आवश्‍यक करना चाहिए। गर्डल बीटल प्रभावित क्षेत्र में जे.एस. 335, जे.एस. 80 – 21, जे.एस 90 – 41, लगावें।

  • निंदाई के समय प्रभावित टहनियां तोड़कर नष्‍ट कर दें
  • कटाई के पश्‍चात बंडलों को सीधे गहाई स्‍थल पर ले जावें
  • तने की मक्‍खी के प्रकोप के समय छिड़काव शीघ्र करें।

सोयाबीन में रोग नियंत्रण कैसे करें

पत्‍तों पर कई तरह के धब्‍बे वाले फफूंद (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) जनित रोगों को नियंत्रित करने के लिए कार्बेन्‍डाजिम 50 डबलू पी या थायोफेनेट मिथाइल 70 डब्‍लू पी 0.05 से 0.1 प्रतिशत से 1 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी का छिड़काव करना चाहिए। पहला छिड़काव 30 -35 दिन की अवस्‍था पर तथा दूसरा छिड़काव 40 – 45 दिन की अवस्‍था पर करना चाहिए।

बैक्‍टीरियल पश्‍चयूल नामक रोग को नियंत्रित करने के लिए स्‍ट्रेप्‍टोसाइक्‍लीन की 200 पी.पी.एम. 200 मि.ग्रा; दवा प्रति लीटर पानी के घोल और कापर आक्‍सीक्‍लोराइड 0.2 (2 ग्राम प्रति लीटर) पानी के घोल के मिश्रण का छिड़काव करना चाहिए। इराके लिए 10 लीटर पानी में 1 ग्राम स्‍ट्रेप्‍टोसाइक्‍लीन एवं 20 ग्राम कापर अक्‍सीक्‍लोराइड दवा का घोल बनाकर उपयोग कर सकते हैं।

विषाणु जनित पीला मोजेक वायरस रोग प्राय: एफ्रिडस सफेद मक्‍खी, थ्रिप्‍स आदि द्वारा फैलते हैं अत: केवल रोग रहित स्‍वस्‍थ बीज का उपयोग करना चाहिए। एवं रोग फैलाने (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) वाले कीड़ों के लिए थायोमेथेक्‍जोन 70 डब्‍लू एव. से 3 ग्राम प्रति किलो ग्राम की दर से उपचारित कर एवं 30 दिनों के अंतराल पर दोहराते रहें। रोगी पौधों को खेत से निकाल देवें। इथोफेनप्राक्‍स 10 ई.सी. 1.0 लीटर प्रति हेक्‍टर थायोमिथेजेम 25 डब्‍लू जी, 1000 ग्राम प्रति हेक्‍टर।

नीम की निम्‍बोली का अर्क डिफोलियेटर्स के नियंत्रण के लिए कारगर साबित हुआ है।

सोयाबीन के प्रमुख कीट व रोग तथा उनका प्रबंधन

तना मक्खी (मिलेनोग्रोमाइजा सोजे)

क्षति का प्रकार – यह कीट पत्तियो पर अण्डे देता है फिर मैगट के बाहर आने के बाद पत्तियों (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) से रैंगता हुआ तने को भेदता है। सक्रंमित तने में लाल धारिया मैगट और प्यूपा के साथ दिखाई देती है। यह तने से जड़ क्षेत्र तक जाकर पौधा मार देता है।

कीट प्रबंधन – नत्रजन उर्वरकों का प्रयोग कम करें।

  • बीज दर अनुमोदित से ज्यादा न रखे।
  • लैम्बडासायहैलोथरीन 4-9 सी .एस. का 300 एम. एल. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

 2. पत्ता मोड़क (लेप्रोसिमा इंडिकेटा)

क्षति का प्रकार – लार्वा पत्तियों (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) को खाता है।

कीट प्रबंधन – प्रोपेनाफास 40% ई.सी. + साइपरमैथरिन 4% ई.सी. का 1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

3. तना छेदक (डेक्टीस टेक्संस)

(Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022)

क्षति का प्रकार – लार्वा तने के बीच में सुरंग बनाकर तने को खा जाता है।

कीट प्रबंधन – ट्राइजोफास 40 ई.सी. का 1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से या फिर प्रोपेनाफास 40% ई.सी + साइपरमैथरिन 4% ई.सी. का 1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

4. तम्बाखू की इल्ली (स्पोडोपटेरा ल्यूटेरा)

क्षति का प्रकार – इल्लिया पत्तियों (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) के क्लोरोफिल (हरे भाग) को खा जाती है फलस्वरूप पत्तिया सफेद पीली पड़ जाती है और एक प्रकार का जाल बन जाता है।

कीट प्रबंधन – पौधों के संक्रमित भागों को अथवा संपूर्ण क्षतिग्रस्त पौधे को नष्ट कर दें।

  • फैरोमोन ट्रैप को 10 ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से लगाये।
  • प्रोपेनोफास 50% ई.सी. का 1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

5. सफेद मक्खी (बेमीषिया टेबाकी)

क्षति का प्रकार – यह बहुभोजी कीट पत्तियों का रस चूसते है जिससे पत्तिया मुड़ जाती है और पीली पड़ जाती है। यह कीट ही पीला मोजेक रोग फैलाता है।

कीट प्रबंधन – संक्रमण की शुरूआती (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) अवस्था में पीले पड़े पत्तों को तोड़ दें और गाय के गोबर उपलो से बनी राख से डस्टिंग करें।

  • थायोमिथाक्सम 25 डब्ल्यू जी. का संक्रमण के स्तर अनुसार 80 से 100 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से स्प्रे करे।
  • पूर्वमिश्रित बीटासायफ्लुथ्रीन 49 + इमिडाक्लोप्रिड 19.81% ओ.डी. का 350 एम.एल. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
  • पूर्वमिश्रित थायो मिथाक्जाम + लैम्बडासायहैलोथरीन का 125 एम.एल. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें यह सफेद मक्खी के साथ साथ पत्ती खाने वाले कीटों का भी नियंत्रण करता है।

6. चने की इल्ली (हैलीकोबर्पा आर्मीगेरा)

क्षति का प्रकार – लार्वा पत्तियों (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) को खाता है और यह सामान्यतः अगस्त माह में आता है यह पौधे को पत्ती विहीन कर देता है और फूल एवं फल्ली दोनो को क्षति पहुँचाता है।

कीट प्रबंधन – 50 मीटर के अंतर पर 5 ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से स्थापित करे।

  • क्यूनोलफास 25 ईसी का 1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से स्प्रे करे।
  • लैम्बडासायहैलोथरीन 9 सी .एस. का 300 एम. एल. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

7. चक्रभ्रंग/गर्डल बीटल (ओवेरिया व्रेबिस)

क्षति का प्रकार – इल्ली और लार्वा दोनो अवस्थाओं में क्षति पहुँचाते है। व्यस्क मादा इल्ली (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) तने पर रिंग बनाती है, रिंग में छेद बनाकर अण्डे देती है अण्डे से निकलने वाली इल्ली तने को अंदर से खाती है और तना सूख जाता है।

कीट प्रबंधन – संक्रमण स्तर कम होने की दषा में पौधे को उखाड़कर मिट्टी में दबा दें। लाइट ट्रैप का इस्तेमाल करें।

  • प्रोपेनाफास 40% ई.सी. का 25 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
  • एच.ए.एन.पी.बी. 250 एल. ई. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

8. सेमील्यूपर (क्राइसोडेक्सिस इन्क्लूडेंस)

क्षति का प्रकार – यह शुरूआती अवस्था और फूल अवस्था में पौधे (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) को नुकसान पहुँचाती है।

कीट प्रबंधन – रोमोन ट्रैप को 10 ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से लगाये।

  • सीलस थ्युरिजिंएसिंस का 1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करे।
  • इंडोकसाकार्ब 8 ई.सी. का 333 एम.एल. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
  • क्लोरनएन्ट्रानिलिपरोल 5 एस. सी. का 100 एम.एल. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

 9. एनथ्रेकनोज/ फली झुलसन

लक्षण – यह एक बीज एवं मृदाजनित रोग है। रोग की शुरूआती अवस्था में पत्तियों (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) तने और फली पर गहरे भूरे रंग के अनियमित धब्बे बन जाते है और बाद में यह धब्बे काली संरचनाओं से भर जाते है।पत्तियों एवं षिराओं का पीला-भूरा होना, मुड़ना और झड़ना इस बीमारी के लक्षण है।

रोग प्रबंधन – खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें।बीज को र्कावेंडाजिम + मेंकोजेब 3 ग्राम प्रति किलो बीच की दर से उपचारित करें

  • रोग के लक्षण दिखाई देने पर 5 ग्राम प्रति लीटर मेंकोजेब अथवा 1 ग्राम प्रति लीटर र्कावेंडाजिम का छिड़काव करें।
  • टेबुकोनाझोल का 625 एम. एल. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

10. पीला मोजेक

लक्षण – पत्तियों पर असामान्य पीले (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) धब्बे पड़ जाते है।सक्रंमित पौधे की बढ़वार रूक जाती है और फली भराव कम होता है व दाना छोटा होता है।

रोग प्रबंधन – सक्रंमण कम होने की दषा में पौधे को उखाड़कर फेंक दें।

  • थायामिथोक्सम 25 डब्ल्यू. जी. का संक्रमण के स्तर के अनुसार 80 से 100 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से स्प्रे करें।
  • पूर्वमिश्रित बीटासायफ़्लुथ्रीन 49 + इमिडाक्लोप्रिड 19.81% ओ.डी. का 350 एम.एल. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
  • पूर्वमिश्रित थायो मिथाक्जाम लैम्बडासायहैलोथरीन का 125 एम.एल. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें यह सफेद मक्खी के साथ साथ पत्ती खाने वाले कीटों का भी नियंत्रण करता है।

11. चारकोल रोट

लक्षण – यह रोग पानी की कमी, निमेटोड अटैक, मिट्टी के कड़क (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) होने की दशा में होता है। इसमें नीचे की पत्तिया पीली पड़ जाती है और पौधा मुरझा जाता है।

रोग प्रबंधन – रोग सहनषील किस्मे जैसे जे.एस.-2034, जे.एस.-2029, जे.एस.-9752 का उपयोग करें।

  • ट्राइकोडर्मा विरडी से 4 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीज उपचारित करें।
  • खड़ी फसल में कार्बेनडाजिम 1 ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें।

12. बैक्टीरियल ब्लाईट

लक्षण– असामान्य पीले बिंदु पत्तियों (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) पर पड़ जाते हैं और फिर मृत दिखाई पड़ते है और फिर बड़े काले धब्बे तना और पत्तियों पर दिखाई देते है।

रोग प्रबंधन– कापर फफूँदनाषक का 2 ग्राम प्रतिलीटर या स्ट्रेप्टोसाइक्लिन का 0.25 ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें।

सोयाबीन कीट- बैक्टीरियल ब्लाईट

हमें यह बात हमेशा ध्यान रखनी है कि रासायनिक नियंत्रण की शुरुआत तभी करनी है जब की कीट व रोग आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले, साथ ही हमें समेकित कीट व रोग प्रबंधन पर ध्यान देना है, जिसकी शरूआत बुवाई से पहले हो जाती है।

जैसे ग्रीष्म कालीन (Kitnashak for Soyabean Cultivation 2022) गहरी जुताई करना, रोग प्रतिरोधक किस्मों का चयन करना, अनुमोदित बीज दर से ज्यादा नही रखना और नत्रजन उर्वरकों का उपयोग नहीं करना और पोटाश की कमी रहने पर पोटाश खादों का उपयोग मिट्टी में सुनिश्चित करना आदि, तभी जाकर हम कीट और रोगों पर विजय प्राप्त कर सकते है।

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राधेश्याम मालवीय

मैं राधेश्याम मालवीय Choupal Samachar हिंदी ब्लॉग का Founder हूँ, मैं पत्रकार के साथ एक सफल किसान हूँ, मैं Agriculture से जुड़े विषय में ज्ञान और रुचि रखता हूँ। अगर आपको खेती किसानी से जुड़ी जानकारी चाहिए, तो आप यहां बेझिझक पुछ सकते है। हमारा यह मकसद है के इस कृषि ब्लॉग पर आपको अच्छी से अच्छी और नई से नई जानकारी आपको मिले।
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