कृषि समाचार

गेहूं फसल की भरपूर पैदावार के लिए उर्वरक के विभिन्न विकल्प, गेहूं की 5 भरपूर पैदावार देने वाली किस्मों के विषय में जानिए

गेहूं फसल की भरपूर पैदावार के लिए किसान उर्वरक के कई विकल्पों से लाभ प्राप्त कर सकते है। इनके द्वारा गेहूं की जोरदार पैदावार हो सकती है।

उज्जैन। उप संचालक किसान कल्याण और कृषि विकास द्वारा जानकारी दी गई कि गेहूं फसल में डीएपी के स्थान पर विभिन्न उर्वरकों के विकल्प मौजूद हैं। किसान भाई गेहूं में डीएपी के स्थान पर अन्य उर्वरक जैसे कि एनपीके 12:32:16 तथा सिंगल सुपर फास्फेट का उपयोग कर सकते हैं। गेहूं में सिफारिश के अनुसार तत्वों की पूर्ति के लिये रासायनिक उर्वरक के भी विभिन्न विकल्प मौजूद हैं।

यह विकल्प है यूरिया के

इसमें बतौर विकल्प यूरिया मात्रा 260 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, सिंगल सुपर फास्फेट मात्रा 375 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, म्युरेट पोटाश मात्रा 67 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा एनपीके 12:32:16 मात्रा 200 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, यूरिया मात्रा 208 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, म्युरेट पोटाश मात्रा 13 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा एनपीके 10:26:26 मात्रा 155 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, यूरिया मात्रा 230 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर और सिंगल सुपर फास्फेट मात्रा 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर का चयन उपलब्धता एवं दर अनुसार किसान भाई कर सकते हैं।

आवश्यक है मिट्टी परीक्षण

उप संचालक ने अपील की है कि किसान भाई मिट्टी परीक्षण अवश्य करायें। परीक्षण के आधार पर नत्रजन, सिंगल सुपर फास्फेट एवं पोटाश की मात्रा का निर्धारण करें। जिंक सल्फेट का प्रयोग तीन फसल के उपरान्त 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से करें। बुवाई के समय स्फुर एवं पोटाश की पूरी तथा नत्रजन 1/3 मात्रा उपयोग करें। नत्रजन की शेष मात्रा दो बराबर हिस्सों में बांटकर पहली और दूसरी सिंचाई के साथ दें।

गेहूं की 5 नई किस्म पर एक नजर

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल (IIWBR) की मानें तो गेहूं की ये पांच किस्में सबसे नई हैं और इनसे उत्पादन भी बंपर होता है।

1. करण नरेन्द्र (Karan Narendra)

ये गेहूं की नवीनतम किस्मों में से एक है. इसे डीबीडब्ल्यू 222 (DBW-222) भी कहते हैं. गेहूं की ये किस्म बाजार में वर्ष 2019 में आई थी और 25 अक्टूबर से 25 नवंबर के बीच इसकी बोवनी कर सकते हैं. इसकी रोटी की गुणवत्ता अच्छी मानी और जाती है. दूसरी किस्मों के लिए जहां 5 से 6 बार सिंचाई की जरूरत पड़ती है, इसमें 4 सिंचाई की ही जरूरत पड़ती है. ये किस्म 143 दिनों में काटने लायक हो जाती है और प्रति हेक्टेयर 65.1 से 82.1 क्विंटल तक पैदावार होती है।

2. करन वंदना (Karan Vandana)

 

इस किस्म की सबसे खास बात ये होती है कि इसमें पीला रतुआ और ब्लास्ट जैसी बीमारियां लगने की संभावना बहुत कम होती है. इस किस्म को डीबीडब्ल्यू-187 (DBW-187) भी कहा जाता है. गेहूं की ये किस्म गंगा तटीय क्षेत्रों के लिए अच्छी मानी जाती है. फसल लगभग 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इस किस्म से प्रति हेक्टेयर लगभग 75 क्विंटल गेहूं पैदा होता है।

3. पूसा यशस्वी (Pusa yashasvi)

 

गेहूं की इस किस्म खेती कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड के लिए सबसे सही मानी जाती है. यह फफूंदी और गलन रोग प्रतिरोधक होती है. इसकी बुवाई का सही समय 5 नवंबर से 25 नवंबर तक सही मानी जाती है. इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 57.5 से 79. 60 क्विंटल तक पैदावार होती है।

4. करण श्रिया (Karan Shriya)

 

गेहूं की ये किस्म जून 2021 में आई थी. इसकी खेती के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य ठीक माने जा रहे हैं.लगभग 127 दिनों में पकने वाली किस्म को मात्र एक सिंचाई की जरूरत पड़ती है. प्रति हेक्टेयर अधिकतम पैदावार 55 क्विंटल है।

5.करण श्रिया (Karan Shriya)

 

गेहूं की इस किस्म में प्रोटीन की मात्रा सबसे ज्यादा (12.69%) होती है. इसके पौधे कई तरह के रोगों से लड़ने में सक्षम होते हैं. कीट और रोगों से खुद की सुरक्षा करने में सक्षम. प्रति हेक्टेयर उत्पादन लगभग 74 क्विंटल।

राधेश्याम मालवीय

मैं राधेश्याम मालवीय Choupal Samachar हिंदी ब्लॉग का Founder हूँ, मैं पत्रकार के साथ एक सफल किसान हूँ, मैं Agriculture से जुड़े विषय में ज्ञान और रुचि रखता हूँ। अगर आपको खेती किसानी से जुड़ी जानकारी चाहिए, तो आप यहां बेझिझक पुछ सकते है। हमारा यह मकसद है के इस कृषि ब्लॉग पर आपको अच्छी से अच्छी और नई से नई जानकारी आपको मिले।
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